सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सहज भीरु कर बचन दृढ़ाई। सागर सन ठानी मचलाई।।
मूल पाठ
सहज भीरु कर बचन दृढ़ाई। सागर सन ठानी मचलाई।।
मूढ़ मृषा का करसि बड़ाई। रिपु बल बुद्धि थाह मैं पाई।।
स्रोत अभिलेख 5.56 · पुस्तक पृ. 764, 765
भावार्थ
मूल पाठ के बादस्वाभाविक ही डरपोक विभीषणके वचनको प्रमाण करके उन्होंने समुद्रसे मचलना (बालहठ) ठाना है। अरे मूर्ख! झूठी बड़ाई क्या करता है! बस, मैंने शत्रु (राम) के बल और बुद्धिकी थाह पा ली॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 764 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सहज भीरु कर बचन दृढ़ाई। सागर सन ठानी मचलाई।।
English explanation
He has accepted the counsel of naturally timid Vibhishana and taken to obstinate pleading with the ocean.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| भीरु | डरपोक विभीषण | timid Vibhishana |
| कर | का | of |
| बचन | वचन | counsel |
| दृढ़ाई | दृढ़ मान लिया | firmly accepted |
| सागर | समुद्र | the ocean |
| सन | से, के सामने | with, before |
| ठानी | ठान ली | has undertaken |
| मचलाई | हठपूर्ण अनुनय | obstinate pleading |
2 मूढ़ मृषा का करसि बड़ाई। रिपु बल बुद्धि थाह मैं पाई।।
English explanation
Fool! Why do you offer false praise? I have fathomed the enemy’s strength and intelligence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मूढ़ | हे मूर्ख | you fool |
| मृषा | झूठी, व्यर्थ | false, unfounded |
| का | क्यों | why |
| करसि | तू करता है | do you give |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
| रिपु | शत्रु के | of the enemy |
| बल | बल | strength |
| बुद्धि | बुद्धि | intelligence |
| थाह | पूरा अनुमान, गहराई | full measure, depth |
| मैं | मैंने | I |
| पाई | जान ली है | have fathomed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.56
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 764
- सहायक विषय
- दूतका रावणको समझाना और लक्ष्मणजीका पत्र देना
- मुद्रित पृष्ठ
- 764, 765
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।