सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सठ सूने हरि आनेहि मोहि। अधम निलज्ज लाज नहिं तोही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरे पापी! तू मुझे सूनेमें हर लाया है। रे अधम! निर्लज्ज! तुझे लज्जा नहीं आती?॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 723 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सठ सूने हरि आनेहि मोहि। अधम निलज्ज लाज नहिं तोही।।
स्रोत अभिलेख 5.9 · पुस्तक पृ. 722, 723
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सठ सूने हरि आनेहि मोहि। अधम निलज्ज लाज नहिं तोही।।
English explanation
“Fool! You abducted and brought me away when no one was there. Base, shameless one! Have you no shame?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सठ | हे मूर्ख | O fool |
| सूने | सूने में; किसी के न होने पर | when no one was present |
| हरि | हरकर; अपहरण करके | having abducted |
| आनेहि | तुम ले आए | you brought away |
| मोहि | मुझे | me |
| अधम | हे नीच | O base one |
| निलज्ज | निर्लज्ज | shameless |
| लाज | लज्जा | shame |
| नहिं | नहीं | no |
| तोही | तुम्हें | to you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 723
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका अशोकवाटिकामें सीताको देखकर दु:खी होना और रावणका सीताजीको भय दिखलाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 722, 723
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।