सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु दसमुख खद्योत प्रकासा। कबहुँ कि नलिनी करइ बिकासा।।
मूल पाठ
सुनु दसमुख खद्योत प्रकासा। कबहुँ कि नलिनी करइ बिकासा।।
अस मन समुझु कहति जानकी। खल सुधि नहिं रघुबीर बान की।।
स्रोत अभिलेख 5.9 · पुस्तक पृ. 722, 723
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे दशमुख! सुन, जुगनूके प्रकाशसे कभी कमलिनी खिल सकती है? जानकीजी फिर कहती हैं— तू [अपने लिये भी] ऐसा ही मनमें समझ ले। रे दुष्ट! तुझे श्रीरघुवीरके बाणकी खबर नहीं है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 722 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनु दसमुख खद्योत प्रकासा। कबहुँ कि नलिनी करइ बिकासा।।
English explanation
“Listen, ten-headed Ravana! Can a lotus ever bloom by the light of a firefly?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| दसमुख | हे दस मुख वाले रावण | O ten-headed Ravana |
| खद्योत | जुगनू | firefly |
| प्रकासा | प्रकाश से | by the light |
| कबहुँ | कभी | ever |
| कि | क्या | can; question marker |
| नलिनी | कमलिनी | lotus |
| करइ | करती है | does |
| बिकासा | खिलना | blooming |
2 अस मन समुझु कहति जानकी। खल सुधि नहिं रघुबीर बान की।।
English explanation
Janaki says, “Understand this in your heart. Wicked one, you have no awareness of Rama’s arrows.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| मन | मन में | in your heart |
| समुझु | समझो | understand |
| कहति | कहती हैं | says |
| जानकी | जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
| खल | हे दुष्ट | O wicked one |
| सुधि | सुध; ज्ञान | awareness |
| नहिं | नहीं | not |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| बान | बाणों | arrows |
| की | की | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 722
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका अशोकवाटिकामें सीताको देखकर दु:खी होना और रावणका सीताजीको भय दिखलाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 722, 723
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।