सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तव अनुचरीं करउँ पन मोरा। एक बार बिलोकु मम ओरा।।
मूल पाठ
तव अनुचरीं करउँ पन मोरा। एक बार बिलोकु मम ओरा।।
तृन धरि ओट कहति बैदेही। सुमिरि अवधपति परम सनेही।।
स्रोत अभिलेख 5.9 · पुस्तक पृ. 722, 723
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं तुम्हारी दासी बना दूँगा, यह मेरा प्रण है। तुम एक बार मेरी ओर देखो तो सही! अपने परम स्नेही कोसलाधीश श्रीरामचन्द्रजीका स्मरण करके जानकीजी तिनकेकी आड़ (परदा) करके कहने लगीं—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 722 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तव अनुचरीं करउँ पन मोरा। एक बार बिलोकु मम ओरा।।
English explanation
“I shall make them your attendants—this is my pledge. Just look toward me once.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | तुम्हारी | your |
| अनुचरीं | सेविकाएँ | female attendants |
| करउँ | मैं बना दूँगा | I shall make |
| पन | प्रतिज्ञा | pledge |
| मोरा | मेरी | my |
| एक | एक | one |
| बार | बार | time |
| बिलोकु | देखो | look |
| मम | मेरी | my |
| ओरा | ओर | direction |
2 तृन धरि ओट कहति बैदेही। सुमिरि अवधपति परम सनेही।।
English explanation
Placing a blade of grass as a screen and remembering Rama, the deeply loving lord of Ayodhya, Sita spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तृन | तिनका | blade of grass |
| धरि | रखकर | having placed |
| ओट | आड़; ओट | screen; barrier |
| कहति | कहती हैं | says |
| बैदेही | विदेह की राजकुमारी सीता | Sita, princess of Videha |
| सुमिरि | स्मरण करके | remembering |
| अवधपति | अयोध्या के स्वामी राम | Rama, lord of Ayodhya |
| परम | अत्यंत | supremely |
| सनेही | स्नेह करने वाले | loving |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 722
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका अशोकवाटिकामें सीताको देखकर दु:खी होना और रावणका सीताजीको भय दिखलाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 722, 723
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।