सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रिषि अगस्ति कीं साप भवानी। राछस भयउ रहा मुनि ग्यानी।।
मूल पाठ
रिषि अगस्ति कीं साप भवानी। राछस भयउ रहा मुनि ग्यानी।।
बंदि राम पद बारहिं बारा। मुनि निज आश्रम कहुँ पगु धारा।।
स्रोत अभिलेख 5.57 · पुस्तक पृ. 765, 766
भावार्थ
मूल पाठ के बाद(शिवजी कहते हैं—) हे भवानी! वह ज्ञानी मुनि था, अगस्त्य ऋषिके शापसे राक्षस हो गया था। बार-बार श्रीरामजीके चरणोंकी वन्दना करके वह मुनि अपने आश्रमको चला गया॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 766 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रिषि अगस्ति कीं साप भवानी। राछस भयउ रहा मुनि ग्यानी।।
English explanation
O Bhavani, he had been a wise sage but became a demon through sage Agastya's curse.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिषि | ऋषि | sage |
| अगस्ति | अगस्त्य | Agastya, the sage |
| कीं | के द्वारा दिए हुए; के कारण | through; caused by |
| साप | शाप | curse |
| भवानी | हे भवानी, पार्वती | O Bhavani, Parvati |
| राछस | राक्षस | demon |
| भयउ | हो गया | became |
| रहा | पहले था | had formerly been |
| मुनि | मुनि | sage |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
2 बंदि राम पद बारहिं बारा। मुनि निज आश्रम कहुँ पगु धारा।।
English explanation
After repeatedly paying homage at Rama's feet, the sage set out toward his own hermitage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदि | वंदना करके | having paid homage |
| राम | राम के | Rama's |
| पद | चरण | feet |
| बारहिं | बार-बार | repeatedly |
| बारा | बार | times |
| मुनि | मुनि शुक | the sage Shuka |
| निज | अपने | his own |
| आश्रम | आश्रम | hermitage |
| कहुँ | की ओर | toward |
| पगु | पग; कदम | step |
| धारा | रखा; बढ़ाया | set; advanced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 766
- सहायक विषय
- दूतका रावणको समझाना और लक्ष्मणजीका पत्र देना
- मुद्रित पृष्ठ
- 765, 766
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।