सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाइ चरन सिरु चला सो तहाँ। कृपासिंधु रघुनायक जहाँ।।
मूल पाठ
नाइ चरन सिरु चला सो तहाँ। कृपासिंधु रघुनायक जहाँ।।
करि प्रनामु निज कथा सुनाई। राम कृपाँ आपनि गति पाई।।
स्रोत अभिलेख 5.57 · पुस्तक पृ. 765, 766
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह भी [विभीषणकी भाँति] चरणोंमें सिर नवाकर वहीं चला, जहाँ कृपासागर श्रीरघुनाथजी थे। प्रणाम करके उसने अपनी कथा सुनायी और श्रीरामजीकी कृपासे अपनी गति (मुनिका स्वरूप) पायी॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 766 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नाइ चरन सिरु चला सो तहाँ। कृपासिंधु रघुनायक जहाँ।।
English explanation
Bowing his head at Ravana's feet, Shuka went to where Rama, the ocean of compassion, was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाइ | झुकाकर | bowing |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| सिरु | सिर | his head |
| चला | चला गया | went |
| सो | वह, शुक | he, Shuka |
| तहाँ | वहाँ | there |
| कृपासिंधु | कृपा के सागर | ocean of compassion |
| रघुनायक | रघुकुल के नायक राम | Rama, leader of Raghu's lineage |
| जहाँ | जहाँ | where |
2 करि प्रनामु निज कथा सुनाई। राम कृपाँ आपनि गति पाई।।
English explanation
After bowing, he told his own story and, through Rama's grace, regained his former state.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having made |
| प्रनामु | प्रणाम | a respectful bow |
| निज | अपनी | his own |
| कथा | कथा; वृत्तांत | story; account |
| सुनाई | सुनाया | recounted |
| राम | राम की | Rama's |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| आपनि | अपनी | his own |
| गति | पूर्व अवस्था; मुनि-स्वरूप | former state as a sage |
| पाई | प्राप्त की | regained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 766
- सहायक विषय
- दूतका रावणको समझाना और लक्ष्मणजीका पत्र देना
- मुद्रित पृष्ठ
- 765, 766
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