सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रावन जबहिं बिभीषन त्यागा। भयउ बिभव बिनु तबहिं अभागा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरावणने जिस क्षण विभीषणको त्यागा, उसी क्षण वह अभागा वैभव (ऐश्वर्य) से हीन हो गया। विभीषणजी हॢषत होकर मनमें अनेकों मनोरथ करते हुए श्रीरघुनाथजीके पास चले॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 752 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रावन जबहिं बिभीषन त्यागा। भयउ बिभव बिनु तबहिं अभागा।।
चलेउ हरषि रघुनायक पाहीं। करत मनोरथ बहु मन माहीं।।
स्रोत अभिलेख 5.42 · पुस्तक पृ. 752, 753
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रावन जबहिं बिभीषन त्यागा। भयउ बिभव बिनु तबहिं अभागा।।
English explanation
As soon as Ravana rejected Vibhishana, the ill-fated ruler became bereft of prosperity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रावन | रावण ने | Ravana |
| जबहिं | जैसे ही | as soon as |
| बिभीषन | विभीषण को | Vibhishana, his brother |
| त्यागा | त्याग दिया | rejected |
| भयउ | हो गया | became |
| बिभव | वैभव; समृद्धि | wealth and prosperity |
| बिनु | बिना; रहित | without; bereft of |
| तबहिं | उसी समय | at that very moment |
| अभागा | अभागा रावण | the ill-fated Ravana |
2 चलेउ हरषि रघुनायक पाहीं। करत मनोरथ बहु मन माहीं।।
English explanation
Vibhishana joyfully set out toward Rama, cherishing many hopes in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलेउ | चल पड़े | set out |
| हरषि | हर्षित होकर | joyfully |
| रघुनायक | रघुकुल के नायक राम के | Rama, leader of Raghu's lineage |
| पाहीं | पास; की ओर | toward; to |
| करत | करते हुए | cherishing |
| मनोरथ | अभिलाषाएँ | hopes; wishes |
| बहु | बहुत-सी | many |
| मन | मन | the heart |
| माहीं | में | within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.42
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 752
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 752, 753
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।