सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखिहउँ जाइ चरन जलजाता। अरुन मृदुल सेवक सुखदाता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[वे सोचते जाते थे—] मैं जाकर भगवान्के कोमल और लाल वर्णके सुन्दर चरणकमलोंके दर्शन करूँगा, जो सेवकोंको सुख देनेवाले हैं, जिन चरणोंका स्पर्श पाकर ऋषिपत्नी अहल्या तर गयीं और जो दण्डकवनको पवित्र करनेवाले हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 752 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देखिहउँ जाइ चरन जलजाता। अरुन मृदुल सेवक सुखदाता।।
जे पद परसि तरी रिषिनारी। दंडक कानन पावनकारी।।
स्रोत अभिलेख 5.42 · पुस्तक पृ. 752, 753
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देखिहउँ जाइ चरन जलजाता। अरुन मृदुल सेवक सुखदाता।।
English explanation
I shall go and behold Rama's lotus-like feet, rosy, tender, and a source of joy to his servants.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखिहउँ | मैं देखूँगा | I shall behold |
| जाइ | जाकर | having gone |
| चरन | चरण | feet |
| जलजाता | कमल-समान | lotus-like |
| अरुन | लालिमा लिए हुए | rosy-red |
| मृदुल | कोमल | tender |
| सेवक | सेवकों को | to his servants |
| सुखदाता | सुख देने वाले | giving joy |
2 जे पद परसि तरी रिषिनारी। दंडक कानन पावनकारी।।
English explanation
Those feet whose touch delivered the sage's wife Ahalya, and which sanctified the Dandaka forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जिन | which |
| पद | चरणों को | feet |
| परसि | स्पर्श करके; स्पर्श पाकर | through contact with |
| तरी | उद्धार पा गई | was delivered |
| रिषिनारी | ऋषि गौतम की पत्नी अहल्या | Ahalya, wife of sage Gautama |
| दंडक | दंडक नामक | Dandaka |
| कानन | वन | forest |
| पावनकारी | पवित्र करने वाले | sanctifying |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.42
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 752
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 752, 753
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।