सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि चला बिभीषनु जबहीं। आयूहीन भए सब तबहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऐसा कहकर विभीषणजी ज्यों ही चले, त्यों ही सब राक्षस आयुहीन हो गये (उनकी मृत्यु निश्चित हो गयी)। [शिवजी कहते हैं—] हे भवानी! साधुका अपमान तुरंत ही सम्पूर्ण कल्याणकी हानि (नाश) कर देता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 752 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस कहि चला बिभीषनु जबहीं। आयूहीन भए सब तबहीं।।
साधु अवग्या तुरत भवानी। कर कल्यान अखिल कै हानी।।
स्रोत अभिलेख 5.42 · पुस्तक पृ. 752, 753
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस कहि चला बिभीषनु जबहीं। आयूहीन भए सब तबहीं।।
English explanation
AI draft: As soon as Vibhishana departed after saying this, everyone's remaining lifespan was cut short.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| चला | चल पड़े | departed |
| बिभीषनु | विभीषण, रावण के भाई | Vibhishana, Ravana's brother |
| जबहीं | जैसे ही | as soon as |
| आयूहीन | आयु से हीन; जिनकी आयु क्षीण हो गई | deprived of their remaining lifespan |
| भए | हो गए | became |
| सब | सब, रावण और उसके पक्ष के लोग | all, Ravana and his people |
| तबहीं | उसी क्षण | at that very moment |
2 साधु अवग्या तुरत भवानी। कर कल्यान अखिल कै हानी।।
English explanation
O Bhavani, disrespect toward a saint immediately destroys all well-being.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साधु | संत की | of a saint |
| अवग्या | अवज्ञा; अनादर | disrespect; disregard |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| भवानी | हे भवानी, पार्वती! | O Bhavani, Parvati! |
| कर | करती है | causes |
| कल्यान | कल्याण | well-being |
| अखिल | समस्त | all |
| कै | की | of |
| हानी | हानि; नाश | loss; destruction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.42
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 752
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 752, 753
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।