सुन्दरकाण्ड · दोहा 41 · दोहा/सोरठा
रामु सत्यसंकल्प प्रभु सभा कालबस तोरि।
रामु सत्यसंकल्प प्रभु सभा कालबस तोरि।
मै रघुबीर सरन अब जाउँ देहु जनि खोरि।।41।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.41 · पुस्तक पृ. 751, 752
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1रामु सत्यसंकल्प प्रभु सभा कालबस तोरि।
‘राम सत्य संकल्प वाले प्रभु हैं; तुम्हारी सभा काल के वश में है।’
English explanation
‘Rama is the Lord whose resolve unfailingly comes true; your court is under the sway of death.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम | Rama |
| सत्यसंकल्प | जिनका संकल्प सत्य होकर रहता है | whose resolve unfailingly comes true |
| प्रभु | प्रभु; स्वामी | the Lord |
| सभा | सभा | court; assembly |
| कालबस | काल अथवा मृत्यु के वश में | under the sway of death or doom |
| तोरि | तुम्हारी | your |
2 मै रघुबीर सरन अब जाउँ देहु जनि खोरि।।41।।
‘मैं अब रघुवीर राम की शरण में जाता हूँ; मुझे दोष मत देना।’
English explanation
‘I now go to seek refuge in Rama, the hero of Raghu’s line; do not blame me.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मै | मैं | I |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम की | of Rama, hero of Raghu’s lineage |
| सरन | शरण में | to refuge |
| अब | अब | now |
| जाउँ | जाता हूँ; जाऊँ | I go; I shall go |
| देहु | देना | give; assign |
| जनि | मत | do not |
| खोरि | दोष; दोषारोपण | blame |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 41
- स्रोत अभिलेख
- 5.41
- सहायक विषय
- रावणको विभीषणका समझाना और विभीषणका अपमान
- मुद्रित पृष्ठ
- 751, 752
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