सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम कपिन्ह जब आवत देखा। किएँ काजु मन हरष बिसेषा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजीने जब वानरोंको कार्य किये हुए आते देखा तब उनके मनमें विशेष हर्ष हुआ। दोनों भाई स्फटिक शिलापर बैठे थे। सब वानर जाकर उनके चरणोंपर गिर पड़े॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 740 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम कपिन्ह जब आवत देखा। किएँ काजु मन हरष बिसेषा।।
फटिक सिला बैठे द्वौ भाई। परे सकल कपि चरनन्हि जाई।।
स्रोत अभिलेख 5.29 · पुस्तक पृ. 740, 740
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम कपिन्ह जब आवत देखा। किएँ काजु मन हरष बिसेषा।।
English explanation
When Rama saw the monkeys approaching, his heart rejoiced greatly because the task had been accomplished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम ने | Rama |
| कपिन्ह | वानरों को | the monkeys |
| जब | जब | when |
| आवत | आते हुए | approaching |
| देखा | देखा | saw |
| किएँ | पूरा हो जाने पर | upon accomplishment |
| काजु | कार्य | the task |
| मन | मन में | in his heart |
| हरष | आनंद | joy |
| बिसेषा | बहुत अधिक | very great |
2 फटिक सिला बैठे द्वौ भाई। परे सकल कपि चरनन्हि जाई।।
English explanation
The two brothers, Rama and Lakshmana, sat on a crystal rock. All the monkeys went and fell at their feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फटिक | स्फटिक की | of crystal |
| सिला | शिला पर | on a rock |
| बैठे | बैठे थे | were seated |
| द्वौ | दोनों | both |
| भाई | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| परे | गिर पड़े | fell down |
| सकल | सभी | all |
| कपि | वानर | monkeys |
| चरनन्हि | चरणों में | at their feet |
| जाई | जाकर | having gone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 740
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 740, 740
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।