सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
यह सपना में कहउँ पुकारी। होइहि सत्य गएँ दिन चारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमैं पुकारकर (निश्चयके साथ) कहती हूँ कि यह स्वप्र चार (कुछ ही) दिनों बाद सत्य होकर रहेगा। उसके वचन सुनकर वे सब राक्षसियाँ डर गयीं और जानकीजीके चरणोंपर गिर पड़ीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 724 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
यह सपना में कहउँ पुकारी। होइहि सत्य गएँ दिन चारी।।
तासु बचन सुनि ते सब डरीं। जनकसुता के चरनन्हि परीं।।
स्रोत अभिलेख 5.11 · पुस्तक पृ. 724, 724
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 यह सपना में कहउँ पुकारी। होइहि सत्य गएँ दिन चारी।।
English explanation
I declare aloud that this dream will come true after four days.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| सपना | सपना | dream |
| में | मैं | I |
| कहउँ | कहती हूँ | say; declare |
| पुकारी | पुकारकर; जोर देकर | aloud; emphatically |
| होइहि | होगा | will become |
| सत्य | सत्य | true |
| गएँ | बीतने पर | after the passing of |
| दिन | दिन | days |
| चारी | चार | four |
2 तासु बचन सुनि ते सब डरीं। जनकसुता के चरनन्हि परीं।।
English explanation
Hearing her words, all the demonesses became frightened and fell at the feet of Sita, Janaka’s daughter.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उस त्रिजटा के | her, Trijata’s |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| ते | वे राक्षसियाँ | those demonesses |
| सब | सब | all |
| डरीं | डर गईं | became frightened |
| जनकसुता | जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
| के | के | of |
| चरनन्हि | चरणों में | at the feet |
| परीं | गिर पड़ीं | fell down |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 724
- सहायक विषय
- श्रीसीता-त्रिजटा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 724, 724
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।