सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिरह अगिनि तनु तूल समीरा। स्वास जरइ छन माहिं सरीरा।।
मूल पाठ
बिरह अगिनि तनु तूल समीरा। स्वास जरइ छन माहिं सरीरा।।
नयन स्त्रवहि जलु निज हित लागी। जरैं न पाव देह बिरहागी।
स्रोत अभिलेख 5.31 · पुस्तक पृ. 741, 742
भावार्थ
मूल पाठ के बादविरह अग्रि है, शरीर रूई है और श्वास पवन है; इस प्रकार [अग्रि और पवनका संयोग होनेसे] यह शरीर क्षणमात्रमें जल सकता है। परन्तु नेत्र अपने हितके लिये (प्रभुका स्वरूप देखकर सुखी होनेके लिये) जल (आँसू) बरसाते हैं, जिससे विरहकी आगसे भी देह जलने नहीं पाती॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 742 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिरह अगिनि तनु तूल समीरा। स्वास जरइ छन माहिं सरीरा।।
English explanation
Separation is fire, the body is cotton, and breath is wind; the body would burn in an instant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिरह | वियोग | separation |
| अगिनि | अग्नि है | is fire |
| तनु | शरीर | the body |
| तूल | रूई है | is cotton |
| समीरा | हवा है | is wind |
| स्वास | साँस | breath |
| जरइ | जल जाए | would burn |
| छन | एक क्षण | an instant |
| माहिं | में | within |
| सरीरा | शरीर | the body |
2 नयन स्त्रवहि जलु निज हित लागी। जरैं न पाव देह बिरहागी।
English explanation
The eyes shed tears for their own sake, so the body cannot burn in the fire of separation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नयन | आँखें | the eyes |
| स्त्रवहि | बहाती हैं | shed |
| जलु | आँसू | tears |
| निज | अपने | their own |
| हित | हित | benefit |
| लागी | के लिए | for the sake of |
| जरैं | जलने | to burn |
| न | नहीं | not |
| पाव | पाता | can |
| देह | शरीर | the body |
| बिरहागी | विरह की अग्नि में | in separation’s fire |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 742
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 741, 742
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।