सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीता के अति बिपति बिसाला। बिनहिं कहें भलि दीनदयाला।।
मूल पाठ
सीता के अति बिपति बिसाला। बिनहिं कहें भलि दीनदयाला।।
स्रोत अभिलेख 5.31 · पुस्तक पृ. 741, 742
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजीकी विपत्ति बहुत बड़ी है। हे दीनदयालु! वह बिना कही ही अच्छी है (कहनेसे आपको बड़ा क्लेश होगा)॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 742 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सीता के अति बिपति बिसाला। बिनहिं कहें भलि दीनदयाला।।
English explanation
Sita’s distress is immense. O compassionate lord of the afflicted, it is better left unspoken.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | श्रीराम की पत्नी सीता | Sita, Rama’s wife |
| के | की | of |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| बिपति | विपत्ति | distress |
| बिसाला | विशाल, बहुत बड़ी | immense |
| बिनहिं | बिना ही | without |
| कहें | कहे | being spoken |
| भलि | अच्छी, बेहतर | better |
| दीनदयाला | हे दीनों पर दया करने वाले राम | O Rama, compassionate toward the afflicted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 742
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 741, 742
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।