सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहुरि राम छबिधाम बिलोकी। रहेउ ठटुकि एकटक पल रोकी।।
मूल पाठ
बहुरि राम छबिधाम बिलोकी। रहेउ ठटुकि एकटक पल रोकी।।
भुज प्रलंब कंजारुन लोचन। स्यामल गात प्रनत भय मोचन।।
स्रोत अभिलेख 5.45 · पुस्तक पृ. 755, 755
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर शोभाके धाम श्रीरामजीको देखकर वे पलक [मारना] रोककर ठिठककर (स्तब्ध होकर) एकटक देखते ही रह गये। भगवान्की विशाल भुजाएँ हैं, लाल कमलके समान नेत्र हैं और शरणागतके भयका नाश करनेवाला साँवला शरीर है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 755 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बहुरि राम छबिधाम बिलोकी। रहेउ ठटुकि एकटक पल रोकी।।
English explanation
Then, beholding Rama, the abode of beauty, Vibhishana stood still, gazing fixedly without blinking.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then |
| राम | श्रीराम को | Rama |
| छबिधाम | सुंदरता के धाम | the abode of beauty |
| बिलोकी | देखकर | having beheld |
| रहेउ | रह गए | remained |
| ठटुकि | ठिठककर | stopping still |
| एकटक | एकटक | with a fixed gaze |
| पल | पलक का झपकना | blinking of the eyelids |
| रोकी | रोककर | having restrained |
2 भुज प्रलंब कंजारुन लोचन। स्यामल गात प्रनत भय मोचन।।
English explanation
Rama’s arms were long, his eyes reddish like lotuses, and his body dark-hued; he removed the fear of those who bowed to him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भुज | भुजाएँ | arms |
| प्रलंब | लंबी | long |
| कंजारुन | कमल जैसे अरुण | reddish like lotuses |
| लोचन | नेत्र | eyes |
| स्यामल | साँवला | dark-hued |
| गात | शरीर | body |
| प्रनत | नतमस्तक या शरणागत जनों का | of those who bow or seek refuge |
| भय | भय | fear |
| मोचन | दूर करने वाले | remover |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 755
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 755, 755
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।