सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिंघ कंध आयत उर सोहा। आनन अमित मदन मन मोहा।।
मूल पाठ
सिंघ कंध आयत उर सोहा। आनन अमित मदन मन मोहा।।
नयन नीर पुलकित अति गाता। मन धरि धीर कही मृदु बाता।।
स्रोत अभिलेख 5.45 · पुस्तक पृ. 755, 755
भावार्थ
मूल पाठ के बादसिंहके-से कंधे हैं, विशाल वक्ष:स्थल (चौड़ी छाती) अत्यन्त शोभा दे रहा है। असंख्य कामदेवोंके मनको मोहित करनेवाला मुख है। भगवान्के स्वरूपको देखकर विभीषणजीके नेत्रोंमें [प्रेमाश्रुओंका] जल भर आया और शरीर अत्यन्त पुलकित हो गया। फिर मनमें धीरज धरकर उन्होंने कोमल वचन कहे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 755 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सिंघ कंध आयत उर सोहा। आनन अमित मदन मन मोहा।।
English explanation
His shoulders were like a lion’s, and his broad chest shone with beauty. His face enchanted the minds of countless gods of love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिंघ | सिंह के समान | like a lion’s |
| कंध | कंधे | shoulders |
| आयत | चौड़ा, विस्तृत | broad, expansive |
| उर | वक्षस्थल | chest |
| सोहा | शोभायमान था | was resplendent |
| आनन | मुख | face |
| अमित | असंख्य | countless |
| मदन | कामदेवों के | of gods of love |
| मन | मन | minds |
| मोहा | मोह लेता था | enchanted |
2 नयन नीर पुलकित अति गाता। मन धरि धीर कही मृदु बाता।।
English explanation
Vibhishana’s eyes filled with tears, and his body thrilled intensely. Composing his mind, he spoke gently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नयन | आँखों में | in the eyes |
| नीर | आँसू | tears |
| पुलकित | रोमांचित, रोम खड़े हुए | thrilled, with hairs standing on end |
| अति | अत्यंत | intensely |
| गाता | शरीर | body |
| मन | मन में | in his mind |
| धरि | धारण करके | having gathered |
| धीर | धीरज | composure |
| कही | कही | spoke |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बाता | बात, वचन | words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 755
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 755, 755
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।