सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ दसानन कर मैं भ्राता। निसिचर बंस जनम सुरत्राता।।
मूल पाठ
नाथ दसानन कर मैं भ्राता। निसिचर बंस जनम सुरत्राता।।
सहज पापप्रिय तामस देहा। जथा उलूकहि तम पर नेहा।।
स्रोत अभिलेख 5.45 · पुस्तक पृ. 755, 755
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! मैं दशमुख रावणका भाई हूँ। हे देवताओंके रक्षक! मेरा जन्म राक्षसकुलमें हुआ है। मेरा तामसी शरीर है, स्वभावसे ही मुझे पाप प्रिय हैं, जैसे उल्लूको अन्धकारपर सहज स्नेह होता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 755 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नाथ दसानन कर मैं भ्राता। निसिचर बंस जनम सुरत्राता।।
English explanation
Lord, I am Ravana’s brother. O protector of the gods, I was born into the demon lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| दसानन | दस मुखों वाले रावण का | of Ravana, the ten-headed one |
| कर | का | of |
| मैं | मैं, विभीषण | I, Vibhishana |
| भ्राता | भाई | brother |
| निसिचर | राक्षसों के | of demons |
| बंस | वंश में | in the lineage |
| जनम | जन्म हुआ | was born |
| सुरत्राता | हे देवताओं के रक्षक | O protector of the gods |
2 सहज पापप्रिय तामस देहा। जथा उलूकहि तम पर नेहा।।
English explanation
My body is dominated by darkness and inertia, and I am naturally drawn to sin, just as an owl loves the dark.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| पापप्रिय | पाप को प्रिय मानने वाला | fond of sin |
| तामस | तमोगुण से युक्त | dominated by darkness and inertia |
| देहा | देह | body |
| जथा | जैसे | just as |
| उलूकहि | उल्लू को | to an owl |
| तम | अंधकार | darkness |
| पर | के प्रति | toward |
| नेहा | प्रेम, लगाव | love, fondness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 755
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 755, 755
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।