सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सादर तेहि आगें करि बानर। चले जहाँ रघुपति करुनाकर।।
मूल पाठ
सादर तेहि आगें करि बानर। चले जहाँ रघुपति करुनाकर।।
दूरिहि ते देखे द्वौ भ्राता। नयनानंद दान के दाता।।
स्रोत अभिलेख 5.45 · पुस्तक पृ. 755, 755
भावार्थ
मूल पाठ के बादविभीषणजीको आदरसहित आगे करके वानर फिर वहाँ चले, जहाँ करुणाकी खान श्रीरघुनाथजी थे। नेत्रोंको आनन्दका दान देनेवाले (अत्यन्त सुखद) दोनों भाइयोंको विभीषणजीने दूरहीसे देखा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 755 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सादर तेहि आगें करि बानर। चले जहाँ रघुपति करुनाकर।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: The monkeys respectfully placed Vibhishana before them and went to where Rama, the compassionate lord of Raghu’s line, was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| तेहि | उसे, विभीषण को | him, Vibhishana |
| आगें | आगे | in front |
| करि | करके | having placed |
| बानर | वानर | the monkeys |
| चले | चल पड़े | went |
| जहाँ | जहाँ | where |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of Raghu’s line |
| करुनाकर | करुणा के भंडार | the source of compassion |
2 दूरिहि ते देखे द्वौ भ्राता। नयनानंद दान के दाता।।
English explanation
From afar, Vibhishana saw the two brothers, Rama and Lakshmana, who bestowed delight upon the eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दूरिहि | दूर से ही | from afar indeed |
| ते | से | from |
| देखे | देखे | saw |
| द्वौ | दोनों | both |
| भ्राता | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| नयनानंद | आँखों का आनंद | delight of the eyes |
| दान | दान, प्रदान करना | the gift, bestowal |
| के | के | of |
| दाता | देने वाले | givers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 755
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 755, 755
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।