सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु प्रताप मैं जाब सुखाई। उतरिहि कटकु न मोरि बड़ाई।।
मूल पाठ
प्रभु प्रताप मैं जाब सुखाई। उतरिहि कटकु न मोरि बड़ाई।।
प्रभु अग्या अपेल श्रुति गाई। करौं सो बेगि जौ तुम्हहि सोहाई।।
स्रोत अभिलेख 5.59 · पुस्तक पृ. 767, 768
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुके प्रतापसे मैं सूख जाऊँगा और सेना पार उतर जायगी, इसमें मेरी बड़ाई नहीं है (मेरी मर्यादा नहीं रहेगी)। तथापि प्रभुकी आज्ञा अपेल है (अर्थात् आपकी आज्ञाका उल्लङ्घन नहीं हो सकता) ऐसा वेद गाते हैं। अब आपको जो अच्छा लगे, मैं तुरंत वही करूँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 767 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रभु प्रताप मैं जाब सुखाई। उतरिहि कटकु न मोरि बड़ाई।।
English explanation
Through the Lord’s might I shall dry up, and the army will cross; no credit for that will be mine.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु के | the Lord’s |
| प्रताप | प्रताप से | through might |
| मैं | मैं, समुद्र | I, the ocean |
| जाब | जाऊँगा | shall become |
| सुखाई | सूखकर | dry |
| उतरिहि | पार उतर जाएगी | will cross |
| कटकु | सेना | army |
| न | नहीं | not |
| मोरि | मेरी | my |
| बड़ाई | बड़ाई या श्रेय | credit or distinction |
2 प्रभु अग्या अपेल श्रुति गाई। करौं सो बेगि जौ तुम्हहि सोहाई।।
English explanation
The Vedas declare the Lord’s command inviolable; if it pleases you, I shall promptly do that.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु की | the Lord’s |
| अग्या | आज्ञा | command |
| अपेल | अटल; जिसे टाला न जा सके | inviolable; not to be evaded |
| श्रुति | वेदों ने | the Vedas |
| गाई | कहा है | have declared |
| करौं | मैं करूँ | I shall do |
| सो | वही | that |
| बेगि | शीघ्र | promptly |
| जौ | यदि | if |
| तुम्हहि | आपको | to you |
| सोहाई | उचित या प्रिय लगे | seems fitting or pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 767
- सहायक विषय
- समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती
- मुद्रित पृष्ठ
- 767, 768
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।