सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रगट बखानहिं राम सुभाऊ। अति सप्रेम गा बिसरि दुराऊ।।
मूल पाठ
प्रगट बखानहिं राम सुभाऊ। अति सप्रेम गा बिसरि दुराऊ।।
रिपु के दूत कपिन्ह तब जाने। सकल बाँधि कपीस पहिं आने।।
स्रोत अभिलेख 5.52 · पुस्तक पृ. 761, 761
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर वे प्रकटरूपमें भी अत्यन्त प्रेमके साथ श्रीरामजीके स्वभावकी बड़ाई करने लगे, उन्हें दुराव (कपट वेष) भूल गया! तब वानरोंने जाना कि ये शत्रुके दूत हैं और वे उन सबको बाँधकर सुग्रीवके पास ले आये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 761 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रगट बखानहिं राम सुभाऊ। अति सप्रेम गा बिसरि दुराऊ।।
English explanation
They openly began praising Rama’s nature. In their deep affection, they forgot to conceal themselves.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रगट | खुले रूप में | openly |
| बखानहिं | बखानते हैं | describe and praise |
| राम | श्रीराम का | of Rama |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| सप्रेम | प्रेम से भरे हुए | filled with affection |
| गा | गया | was gone |
| बिसरि | भूल | forgotten |
| दुराऊ | छिपाव; पहचान छिपाना | concealment of their identity |
2 रिपु के दूत कपिन्ह तब जाने। सकल बाँधि कपीस पहिं आने।।
English explanation
The monkeys then recognized them as the enemy’s messengers, bound them all, and brought them before Sugriva, the monkey king.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिपु | शत्रु | the enemy |
| के | के | of |
| दूत | दूत | messengers |
| कपिन्ह | वानरों ने | the monkeys |
| तब | तब | then |
| जाने | पहचान लिया | recognized |
| सकल | सबको | all of them |
| बाँधि | बाँधकर | having bound |
| कपीस | वानरराज सुग्रीव | Sugriva, the monkey king |
| पहिं | के पास | before; to |
| आने | ले आए | brought |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.52
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 761
- सहायक विषय
- समुद्र पार करनेके लिये विचार, रावणदूत शुकका आना और लक्ष्मणजीके पत्रको लेकर लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 761, 761
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।