सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नूतन किसलय अनल समाना। देहि अगिनि जनि करहि निदाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतेरे नये-नये कोमल पत्ते अग्रिके समान हैं। अग्रि दे, विरह-रोगका अन्त मत कर (अर्थात् विरह-रोगको बढ़ाकर सीमातक न पहुँचा)। सीताजीको विरहसे परम व्याकुल देखकर वह क्षण हनुमान्जीको कल्पके समान बीता॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 725 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नूतन किसलय अनल समाना। देहि अगिनि जनि करहि निदाना।।
देखि परम बिरहाकुल सीता। सो छन कपिहि कलप सम बीता।।
स्रोत अभिलेख 5.12 · पुस्तक पृ. 724, 725
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नूतन किसलय अनल समाना। देहि अगिनि जनि करहि निदाना।।
English explanation
“Your fresh tender leaves resemble fire; give me fire, do not delay.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नूतन | नए | fresh |
| किसलय | कोमल पत्ते | tender leaves |
| अनल | आग | fire |
| समाना | के समान | like |
| देहि | दो | give |
| अगिनि | आग | fire |
| जनि | मत | do not |
| करहि | करो | make |
| निदाना | विलंब | delay |
2 देखि परम बिरहाकुल सीता। सो छन कपिहि कलप सम बीता।।
English explanation
Seeing Sita utterly distraught by separation, Hanuman experienced that moment as an age.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| परम | अत्यंत | extremely |
| बिरहाकुल | वियोग से व्याकुल | distraught by separation |
| सीता | सीता को | Sita |
| सो | वह | that |
| छन | क्षण | moment |
| कपिहि | हनुमान के लिए | for Hanuman |
| कलप | कल्प; अत्यंत दीर्घ काल | a cosmic age |
| सम | के समान | like |
| बीता | बीता | passed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 725
- सहायक विषय
- श्रीसीता-त्रिजटा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 724, 725
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।