सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पावकमय ससि स्त्रवत न आगी। मानहुँ मोहि जानि हतभागी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दचन्द्रमा अग्रिमय है, किन्तु वह भी मानो मुझे हतभागिनी जानकर आग नहीं बरसाता। हे अशोकवृक्ष! मेरी विनती सुन! मेरा शोक हर ले और अपना [अशोक] नाम सत्य कर॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 725 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पावकमय ससि स्त्रवत न आगी। मानहुँ मोहि जानि हतभागी।।
सुनहि बिनय मम बिटप असोका। सत्य नाम करु हरु मम सोका।।
स्रोत अभिलेख 5.12 · पुस्तक पृ. 724, 725
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पावकमय ससि स्त्रवत न आगी। मानहुँ मोहि जानि हतभागी।।
English explanation
“Even the fire-filled moon sheds no fire, as though it knows me to be unfortunate.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पावकमय | आग से भरा | filled with fire |
| ससि | चंद्रमा | the moon |
| स्त्रवत | बरसाता; स्रवित करता | sheds; pours forth |
| न | नहीं | not |
| आगी | आग | fire |
| मानहुँ | मानो | as though |
| मोहि | मुझे | me |
| जानि | जानकर | knowing |
| हतभागी | अभागी | unfortunate |
2 सुनहि बिनय मम बिटप असोका। सत्य नाम करु हरु मम सोका।।
English explanation
“O ashoka tree, hear my plea. Make your name true by removing my sorrow.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहि | सुनो | hear |
| बिनय | विनती | plea |
| मम | मेरी | my |
| बिटप | हे वृक्ष | O tree |
| असोका | अशोक | ashoka, the sorrowless tree |
| सत्य | सच्चा | true |
| नाम | अपना नाम | your name |
| करु | करो | make |
| हरु | दूर करो | remove |
| मम | मेरा | my |
| सोका | शोक | sorrow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 725
- सहायक विषय
- श्रीसीता-त्रिजटा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 724, 725
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।