सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कह सीता बिधि भा प्रतिकूला। मिलहि न पावक मिटिहि न सूला।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसीताजी [मन-ही-मन] कहने लगीं—[क्या करूँ] विधाता ही विपरीत हो गया। न आग मिलेगी, न पीड़ा मिटेगी। आकाशमें अङ्गारे प्रकट दिखायी दे रहे हैं, पर पृथ्वीपर एक भी तारा नहीं आता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 725 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कह सीता बिधि भा प्रतिकूला। मिलहि न पावक मिटिहि न सूला।।
देखिअत प्रगट गगन अंगारा। अवनि न आवत एकउ तारा।।
स्रोत अभिलेख 5.12 · पुस्तक पृ. 724, 725
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कह सीता बिधि भा प्रतिकूला। मिलहि न पावक मिटिहि न सूला।।
English explanation
Sita said, “Fate has turned against me; neither will fire be found nor will my anguish end.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| बिधि | विधाता; भाग्य | the ordainer; fate |
| भा | हो गया | has become |
| प्रतिकूला | विरुद्ध | adverse |
| मिलहि | मिलेगी | will be found |
| न | नहीं | not |
| पावक | आग | fire |
| मिटिहि | मिटेगी | will cease |
| न | नहीं | not |
| सूला | पीड़ा | anguish |
2 देखिअत प्रगट गगन अंगारा। अवनि न आवत एकउ तारा।।
English explanation
“Embers are plainly visible in the sky, yet not even one star comes down to earth.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखिअत | दिखाई देते हैं | are seen |
| प्रगट | स्पष्ट | plainly |
| गगन | आकाश में | in the sky |
| अंगारा | अंगारे | embers |
| अवनि | धरती पर | to earth |
| न | नहीं | not |
| आवत | आता | comes |
| एकउ | एक भी | even one |
| तारा | तारा | star |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 725
- सहायक विषय
- श्रीसीता-त्रिजटा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 724, 725
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।