सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत बचन पद गहि समुझाएसि। प्रभु प्रताप बल सुजसु सुनाएसि।।
मूल पाठ
सुनत बचन पद गहि समुझाएसि। प्रभु प्रताप बल सुजसु सुनाएसि।।
निसि न अनल मिल सुनु सुकुमारी। अस कहि सो निज भवन सिधारी।।
स्रोत अभिलेख 5.12 · पुस्तक पृ. 724, 725
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजीके वचन सुनकर त्रिजटाने चरण पकड़कर उन्हें समझाया और प्रभुका प्रताप, बल और सुयश सुनाया। [उसने कहा—] हे सुकुमारी! सुनो, रात्रिके समय आग नहीं मिलेगी। ऐसा कहकर वह अपने घर चली गयी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 725 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनत बचन पद गहि समुझाएसि। प्रभु प्रताप बल सुजसु सुनाएसि।।
English explanation
Hearing these words, Trijata clasped Sita’s feet and reassured her, recounting Lord Rama’s might, strength, and noble fame.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| बचन | वचन | the words |
| पद | सीता के चरण | Sita’s feet |
| गहि | पकड़कर | having clasped |
| समुझाएसि | त्रिजटा ने समझाया | Trijata reassured her |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| प्रताप | प्रताप | might |
| बल | बल | strength |
| सुजसु | सुंदर यश | noble fame |
| सुनाएसि | त्रिजटा ने सुनाया | Trijata recounted |
2 निसि न अनल मिल सुनु सुकुमारी। अस कहि सो निज भवन सिधारी।।
English explanation
“Listen, tender one, fire is not available at night.” Saying this, Trijata went to her own dwelling.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसि | रात में | at night |
| न | नहीं | not |
| अनल | आग | fire |
| मिल | मिलती | is available |
| सुनु | सुनो | listen |
| सुकुमारी | हे कोमलांगी सीता | O tender Sita |
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| सो | वह त्रिजटा | she, Trijata |
| निज | अपने | her own |
| भवन | घर | dwelling |
| सिधारी | चली गई | departed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 725
- सहायक विषय
- श्रीसीता-त्रिजटा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 724, 725
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।