सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आनि काठ रचु चिता बनाई। मातु अनल पुनि देहि लगाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकाठ लाकर चिता बनाकर सजा दे। हे माता! फिर उसमें आग लगा दे। हे सयानी! तू मेरी प्रीतिको सत्य कर दे। रावणकी शूलके समान दु:ख देनेवाली वाणी कानोंसे कौन सुने?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 725 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आनि काठ रचु चिता बनाई। मातु अनल पुनि देहि लगाई।।
सत्य करहि मम प्रीति सयानी। सुनै को श्रवन सूल सम बानी।।
स्रोत अभिलेख 5.12 · पुस्तक पृ. 724, 725
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 आनि काठ रचु चिता बनाई। मातु अनल पुनि देहि लगाई।।
English explanation
“Bring wood and prepare a funeral pyre; mother, then set it alight.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आनि | लाकर | having brought |
| काठ | लकड़ी | wood |
| रचु | रचो | construct |
| चिता | चिता | a funeral pyre |
| बनाई | तैयार करके | making ready |
| मातु | हे माता | O mother |
| अनल | आग | fire |
| पुनि | फिर | then |
| देहि | दे दो | give |
| लगाई | लगाकर | by setting alight |
2 सत्य करहि मम प्रीति सयानी। सुनै को श्रवन सूल सम बानी।।
English explanation
“Wise one, prove your affection for me true. Who can bear to hear words that pierce the ears like spikes?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्य | सच्चा | true |
| करहि | कर दिखाओ | make manifest |
| मम | मेरे प्रति | toward me |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| सयानी | हे समझदार स्त्री | O wise woman |
| सुनै | सुने | would hear |
| को | कौन | who |
| श्रवन | कानों में | in the ears |
| सूल | शूल | a piercing spike |
| सम | के समान | like |
| बानी | वाणी; बातें | words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 725
- सहायक विषय
- श्रीसीता-त्रिजटा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 724, 725
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।