सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
त्रिजटा सन बोली कर जोरी। मातु बिपति संगिनि तैं मोरी।।
मूल पाठ
त्रिजटा सन बोली कर जोरी। मातु बिपति संगिनि तैं मोरी।।
तजौं देह करु बेगि उपाई। दुसहु बिरहु अब नहिं सहि जाई।।
स्रोत अभिलेख 5.12 · पुस्तक पृ. 724, 725
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजी हाथ जोड़कर त्रिजटासे बोलीं—हे माता! तू मेरी विपत्तिकी संगिनी है। जल्दी कोई ऐसा उपाय कर जिससे मैं शरीर छोड़ सकूँ। विरह असह्य हो चला है, अब यह सहा नहीं जाता॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 724 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 त्रिजटा सन बोली कर जोरी। मातु बिपति संगिनि तैं मोरी।।
English explanation
With folded hands, Sita said to Trijata, “Mother, you are my companion in adversity.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| त्रिजटा | त्रिजटा, सीता की हितैषी राक्षसी | Trijata, a demoness sympathetic to Sita |
| सन | से | to |
| बोली | सीता बोलीं | Sita said |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
| मातु | हे माता | O mother |
| बिपति | विपत्ति में | in adversity |
| संगिनि | साथ देने वाली | companion |
| तैं | तुम | you |
| मोरी | मेरी | my |
2 तजौं देह करु बेगि उपाई। दुसहु बिरहु अब नहिं सहि जाई।।
English explanation
“Quickly arrange a means for me to relinquish my body; I can no longer endure this unbearable separation.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तजौं | मैं त्याग दूँ | that I may relinquish |
| देह | शरीर | the body |
| करु | करो | make |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| उपाई | उपाय | an arrangement |
| दुसहु | असह्य | unbearable |
| बिरहु | प्रिय से वियोग | separation from the beloved |
| अब | अब | now |
| नहिं | नहीं | not |
| सहि | सहा | endured |
| जाई | जा सकता | can be |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 724
- सहायक विषय
- श्रीसीता-त्रिजटा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 724, 725
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