सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निबुकि चढ़ेउ कपि कनक अटारीं। भई सभीत निसाचर नारीं।।
मूल पाठ
निबुकि चढ़ेउ कपि कनक अटारीं। भई सभीत निसाचर नारीं।।
स्रोत अभिलेख 5.25 · पुस्तक पृ. 737, 737
भावार्थ
मूल पाठ के बादबन्धनसे निकलकर वे सोनेकी अटारियोंपर जा चढ़े। उनको देखकर राक्षसोंकी स्त्रियाँ भयभीत हो गयीं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 737 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 निबुकि चढ़ेउ कपि कनक अटारीं। भई सभीत निसाचर नारीं।।
English explanation
Slipping free of his bonds, Hanuman climbed onto a golden rooftop; the demon women became frightened.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निबुकि | बंधन से निकलकर | slipping free of bonds |
| चढ़ेउ | चढ़ गए | climbed |
| कपि | हनुमान | Hanuman |
| कनक | सोने की | golden |
| अटारीं | अटारी पर | onto a rooftop terrace |
| भई | हो गईं | became |
| सभीत | भयभीत | frightened |
| निसाचर | राक्षसों की | of the demons |
| नारीं | स्त्रियाँ | women |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 737
- सहायक विषय
- लङ्का-दहन
- मुद्रित पृष्ठ
- 737, 737
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