सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बाजहिं ढोल देहिं सब तारी। नगर फेरि पुनि पूँछ प्रजारी।।
मूल पाठ
बाजहिं ढोल देहिं सब तारी। नगर फेरि पुनि पूँछ प्रजारी।।
पावक जरत देखि हनुमंता। भयउ परम लघु रुप तुरंता।।
स्रोत अभिलेख 5.25 · पुस्तक पृ. 737, 737
भावार्थ
मूल पाठ के बादढोल बजते हैं, सब लोग तालियाँ पीटते हैं। हनुमान्जीको नगरमें फिराकर, फिर पूँछमें आग लगा दी। अग्रिको जलते हुए देखकर हनुमान्जी तुरंत ही बहुत छोटे रूपमें हो गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 737 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बाजहिं ढोल देहिं सब तारी। नगर फेरि पुनि पूँछ प्रजारी।।
English explanation
Drums sounded and everyone clapped; after parading Hanuman around the city, they set his tail alight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाजहिं | बजते हैं | sound |
| ढोल | ढोल | drums |
| देहिं | बजाते हैं | give; clap |
| सब | सब लोग | everyone |
| तारी | ताली | claps |
| नगर | नगर में | around the city |
| फेरि | घुमाकर | having paraded him |
| पुनि | फिर | then |
| पूँछ | पूँछ | tail |
| प्रजारी | जला दी | set alight |
2 पावक जरत देखि हनुमंता। भयउ परम लघु रुप तुरंता।।
English explanation
Seeing the fire burning, Hanuman immediately assumed an extremely small form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पावक | आग | fire |
| जरत | जलती हुई | burning |
| देखि | देखकर | seeing |
| हनुमंता | हनुमान | Hanuman |
| भयउ | हो गए | became |
| परम | अत्यंत | extremely |
| लघु | छोटा | small |
| रुप | रूप | form |
| तुरंता | तुरंत | immediately |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 737
- सहायक विषय
- लङ्का-दहन
- मुद्रित पृष्ठ
- 737, 737
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