सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रहा न नगर बसन घृत तेला। बाढ़ी पूँछ कीन्ह कपि खेला।।
मूल पाठ
रहा न नगर बसन घृत तेला। बाढ़ी पूँछ कीन्ह कपि खेला।।
कौतुक कहँ आए पुरबासी। मारहिं चरन करहिं बहु हाँसी।।
स्रोत अभिलेख 5.25 · पुस्तक पृ. 737, 737
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[पूँछके लपेटनेमें इतना कपड़ा और घी-तेल लगा कि] नगरमें कपड़ा, घी और तेल नहीं रह गया। हनुमान्जीने ऐसा खेल किया कि पूँछ बढ़ गयी (लंबी हो गयी)। नगरवासीलोग तमाशा देखने आये। वे हनुमान्जीको पैरसे ठोकर मारते हैं और उनकी बहुत हँसी करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 737 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रहा न नगर बसन घृत तेला। बाढ़ी पूँछ कीन्ह कपि खेला।।
English explanation
No cloth, ghee, or oil remained in the city; Hanuman playfully lengthened his tail.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहा | बचा रहा | remained |
| न | नहीं | not |
| नगर | नगर में | in the city |
| बसन | कपड़ा | cloth |
| घृत | घी | clarified butter |
| तेला | तेल | oil |
| बाढ़ी | बढ़ गई | grew longer |
| पूँछ | पूँछ | tail |
| कीन्ह | किया | performed |
| कपि | हनुमान ने | Hanuman |
| खेला | खेल, चंचल कौतुक | a playful feat |
2 कौतुक कहँ आए पुरबासी। मारहिं चरन करहिं बहु हाँसी।।
English explanation
The townspeople came to watch the spectacle; they kicked him and mocked him with much laughter.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौतुक | तमाशा देखने | to watch the spectacle |
| कहँ | के लिए | for |
| आए | आए | came |
| पुरबासी | नगरवासी | townspeople |
| मारहिं | मारते हैं | strike |
| चरन | पैरों से, लातें | with their feet; kicks |
| करहिं | करते हैं | make |
| बहु | बहुत | much |
| हाँसी | हँसी, उपहास | laughter and mockery |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 737
- सहायक विषय
- लङ्का-दहन
- मुद्रित पृष्ठ
- 737, 737
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