सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि मनहि महुँ कीन्ह प्रनामा। बैठेहिं बीति जात निसि जामा।।
मूल पाठ
देखि मनहि महुँ कीन्ह प्रनामा। बैठेहिं बीति जात निसि जामा।।
कृस तन सीस जटा एक बेनी। जपति हृदयँ रघुपति गुन श्रेनी।।
स्रोत अभिलेख 5.8 · पुस्तक पृ. 721, 722
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजीको देखकर हनुमान्जीने उन्हें मनहीमें प्रणाम किया। उन्हें बैठे-ही-बैठे रात्रिके चारों पहर बीत जाते हैं। शरीर दुबला हो गया है, सिरपर जटाओंकी एक वेणी (लट) है। हृदयमें श्रीरघुनाथजीके गुणसमूहोंका जाप (स्मरण) करती रहती हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 722 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि मनहि महुँ कीन्ह प्रनामा। बैठेहिं बीति जात निसि जामा।।
English explanation
Seeing Sita, Hanuman bowed inwardly. As he remained seated, a watch of the night was passing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen her |
| मनहि | मन ही में | in the mind alone |
| महुँ | में | within |
| कीन्ह | किया | performed |
| प्रनामा | प्रणाम | a respectful bow |
| बैठेहिं | बैठे ही; बैठे-बैठे | while remaining seated |
| बीति | बीतता | passing |
| जात | जा रहा था | was continuing |
| निसि | रात का | of the night |
| जामा | पहर | a watch; a division of the night |
2 कृस तन सीस जटा एक बेनी। जपति हृदयँ रघुपति गुन श्रेनी।।
English explanation
Sita’s body was emaciated, and her matted hair formed a single braid upon her head. In her heart she was repeating Rama’s many virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कृस | दुबला; क्षीण | emaciated; thin |
| तन | शरीर | body |
| सीस | सिर पर | on the head |
| जटा | जटाएँ; उलझे हुए बाल | matted hair |
| एक | एक | one; single |
| बेनी | वेणी; चोटी | braid |
| जपति | जपती थीं; बार-बार स्मरण करती थीं | was repeating; recalling repeatedly |
| हृदयँ | हृदय में | in her heart |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम के | of Rama, lord of the Raghu lineage |
| गुन | गुणों की | of virtues |
| श्रेनी | श्रेणी; समूह | series; multitude |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 722
- सहायक विषय
- हनुमान्-विभीषण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 721, 722
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।