सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब लगि हृदयँ बसत खल नाना। लोभ मोह मच्छर मद माना।।
मूल पाठ
तब लगि हृदयँ बसत खल नाना। लोभ मोह मच्छर मद माना।।
जब लगि उर न बसत रघुनाथा। धरें चाप सायक कटि भाथा।।
स्रोत अभिलेख 5.47 · पुस्तक पृ. 756, 757
भावार्थ
मूल पाठ के बादलोभ, मोह, मत्सर (डाह), मद और मान आदि अनेकों दुष्ट तभीतक हृदयमें बसते हैं, जबतक कि धनुष-बाण और कमरमें तरकस धारण किये हुए श्रीरघुनाथजी हृदयमें नहीं बसते॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 756 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब लगि हृदयँ बसत खल नाना। लोभ मोह मच्छर मद माना।।
English explanation
AI-draft meaning: Many evil tendencies—greed, delusion, envy, intoxicated pride, and conceit—remain in the heart only until—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| लगि | तक | until |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| बसत | रहते हैं | dwell |
| खल | दुष्ट विकार | evil tendencies |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| लोभ | लालच | greed |
| मोह | मोह, विवेक को ढकने वाला लगाव | delusive attachment |
| मच्छर | ईर्ष्या | envy |
| मद | मद, अहंकार का नशा | intoxicated pride |
| माना | अभिमान | conceit |
2 जब लगि उर न बसत रघुनाथा। धरें चाप सायक कटि भाथा।।
English explanation
Until Rama, bearing a bow and arrows with a quiver at his waist, dwells in the heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| लगि | तक | as long as |
| उर | हृदय में | in the heart |
| न | नहीं | not |
| बसत | बसते हैं | dwells |
| रघुनाथा | रघुकुल के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| धरें | धारण किए हुए | bearing |
| चाप | धनुष | bow |
| सायक | बाण | arrows |
| कटि | कमर में | at the waist |
| भाथा | तरकस | quiver |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.47
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 756
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 756, 757
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।