सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ममता तरुन तमी अँधिआरी। राग द्वेष उलूक सुखकारी।।
मूल पाठ
ममता तरुन तमी अँधिआरी। राग द्वेष उलूक सुखकारी।।
तब लगि बसति जीव मन माहीं। जब लगि प्रभु प्रताप रबि नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 5.47 · पुस्तक पृ. 756, 757
भावार्थ
मूल पाठ के बादममता पूर्ण अँधेरी रात है, जो राग-द्वेषरूपी उल्लुओंको सुख देनेवाली है। वह (ममतारूपी रात्रि) तभीतक जीवके मनमें बसती है, जबतक प्रभु (आप) का प्रतापरूपी सूर्य उदय नहीं होता॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 756 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ममता तरुन तमी अँधिआरी। राग द्वेष उलूक सुखकारी।।
English explanation
Possessive attachment is a deep, dark night that delights the owls of attachment and aversion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ममता | मेरापन, अधिकार का लगाव | possessive attachment |
| तरुन | पूर्ण विकसित, प्रगाढ़ | fully developed; deep |
| तमी | रात | night |
| अँधिआरी | अँधेरी | dark |
| राग | आसक्ति | attachment |
| द्वेष | वैरभाव | aversion |
| उलूक | उल्लू | owls |
| सुखकारी | सुख देने वाली | giving delight |
2 तब लगि बसति जीव मन माहीं। जब लगि प्रभु प्रताप रबि नाहीं।।
English explanation
That night of possessiveness remains in the living being’s mind only as long as the sun of the Lord’s glory is absent.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| लगि | तक | until |
| बसति | रहती है | dwells |
| जीव | जीव का | the living being’s |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | within |
| जब | जब | when |
| लगि | तक | as long as |
| प्रभु | प्रभु श्रीराम का | of Lord Rama |
| प्रताप | तेज, प्रभाव | glory and might |
| रबि | सूर्य | sun |
| नाहीं | नहीं है | is absent |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.47
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 756
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 756, 757
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।