सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब मैं कुसल मिटे भय भारे। देखि राम पद कमल तुम्हारे।।
मूल पाठ
अब मैं कुसल मिटे भय भारे। देखि राम पद कमल तुम्हारे।।
तुम्ह कृपाल जा पर अनुकूला। ताहि न ब्याप त्रिबिध भव सूला।।
स्रोत अभिलेख 5.47 · पुस्तक पृ. 756, 757
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे श्रीरामजी! आपके चरणारविन्दके दर्शन कर अब मैं कुशलसे हूँ, मेरे भारी भय मिट गये। हे कृपालु! आप जिसपर अनुकूल होते हैं, उसे तीनों प्रकारके भवशूल (आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक ताप) नहीं व्यापते॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 757 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अब मैं कुसल मिटे भय भारे। देखि राम पद कमल तुम्हारे।।
English explanation
Rama, having seen your lotus feet, I am now well; my great fears have vanished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| मैं | मैं | I |
| कुसल | कुशल, सुरक्षित | well and safe |
| मिटे | मिट गए | have vanished |
| भय | डर | fears |
| भारे | बड़े, भारी | great and burdensome |
| देखि | देखकर | having seen |
| राम | हे श्रीराम | O Rama |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल समान | lotus-like |
| तुम्हारे | आपके | your |
2 तुम्ह कृपाल जा पर अनुकूला। ताहि न ब्याप त्रिबिध भव सूला।।
English explanation
Merciful Lord, whoever receives your favor is not afflicted by the three kinds of worldly suffering.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| कृपाल | हे कृपालु | O merciful one |
| जा | जिस | whom |
| पर | पर | toward |
| अनुकूला | अनुग्रहशील, अनुकूल हैं | are favorable |
| ताहि | उसे | that person |
| न | नहीं | not |
| ब्याप | सताते, प्रभावित करते | afflict |
| त्रिबिध | तीन प्रकार के | threefold |
| भव | संसार के | of worldly existence |
| सूला | पीड़ाएँ, ताप | pains; afflictions |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.47
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 757
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 756, 757
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।