सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जितेहु सुरासुर तब श्रम नाहीं। नर बानर केहि लेखे माही।।
मूल पाठ
जितेहु सुरासुर तब श्रम नाहीं। नर बानर केहि लेखे माही।।
स्रोत अभिलेख 5.37 · पुस्तक पृ. 748, 748
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपने देवताओं और राक्षसोंको जीत लिया, तब तो कुछ श्रम ही नहीं हुआ। फिर मनुष्य और वानर किस गिनतीमें हैं?॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 748 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जितेहु सुरासुर तब श्रम नाहीं। नर बानर केहि लेखे माही।।
English explanation
You conquered gods and demons without even exertion then; what account are humans and monkeys?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जितेहु | आपने जीत लिया | you conquered |
| सुरासुर | देवताओं और असुरों को | gods and demons |
| तब | तब | then |
| श्रम | परिश्रम | exertion |
| नाहीं | नहीं हुआ | there was none |
| नर | मनुष्य | humans |
| बानर | वानर | monkeys |
| केहि | किस | what |
| लेखे | गिनती, महत्त्व | account, importance |
| माही | में | in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 748
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 748, 748
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।