सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जासु दूत बल बरनि न जाई। तेहि आएँ पुर कवन भलाई।।
मूल पाठ
जासु दूत बल बरनि न जाई। तेहि आएँ पुर कवन भलाई।।
दूतन्हि सन सुनि पुरजन बानी। मंदोदरी अधिक अकुलानी।।
स्रोत अभिलेख 5.36 · पुस्तक पृ. 747, 747
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिसके दूतका बल वर्णन नहीं किया जा सकता, उसके स्वयं नगरमें आनेपर कौन भलाई है (हमलोगोंकी बड़ी बुरी दशा होगी)? दूतियोंसे नगरनिवासियोंके वचन सुनकर मन्दोदरी बहुत ही व्याकुल हो गयी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 747 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जासु दूत बल बरनि न जाई। तेहि आएँ पुर कवन भलाई।।
English explanation
When the one whose envoy’s strength cannot be described arrives himself, what good can await the city?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिसके, अर्थात राम के | whose, referring to Rama |
| दूत | दूत हनुमान का | of the envoy Hanuman |
| बल | बल | strength |
| बरनि | वर्णन किया | described |
| न | नहीं | not |
| जाई | जा सकता | can be |
| तेहि | उसके, अर्थात राम के | of him, Rama |
| आएँ | आने पर | upon arriving |
| पुर | नगर की | for the city |
| कवन | क्या; कैसी | what; what kind of |
| भलाई | भलाई; कुशल | well-being |
2 दूतन्हि सन सुनि पुरजन बानी। मंदोदरी अधिक अकुलानी।।
English explanation
Hearing these words of the townspeople from messengers, Mandodari became deeply distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दूतन्हि | दूतों | messengers |
| सन | से | from |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| पुरजन | नगरवासियों की | of the townspeople |
| बानी | बातें; वाणी | words; speech |
| मंदोदरी | रावण की पत्नी मंदोदरी | Mandodari, Ravana’s wife |
| अधिक | बहुत अधिक | greatly |
| अकुलानी | व्याकुल हो गई | became distressed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 747
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 747, 747
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