सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रहसि जोरि कर पति पग लागी। बोली बचन नीति रस पागी।।
मूल पाठ
रहसि जोरि कर पति पग लागी। बोली बचन नीति रस पागी।।
कंत करष हरि सन परिहरहू। मोर कहा अति हित हियँ धरहु।।
स्रोत अभिलेख 5.36 · पुस्तक पृ. 747, 747
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह एकान्तमें हाथ जोड़कर पति (रावण) के चरणों लगी और नीतिरसमें पगी हुई वाणी बोली—हे प्रियतम! श्रीहरिसे विरोध छोड़ दीजिये। मेरे कहनेको अत्यन्त ही हितकर जानकर हृदयमें धारण कीजिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 747 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रहसि जोरि कर पति पग लागी। बोली बचन नीति रस पागी।।
English explanation
In private, she joined her hands, bowed at her husband’s feet, and spoke words steeped in prudent counsel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहसि | एकांत में | in private |
| जोरि | जोड़कर | having joined |
| कर | हाथ | hands |
| पति | पति रावण के | of her husband Ravana |
| पग | चरणों में | at the feet |
| लागी | लगी; प्रणाम किया | bowed; paid obeisance |
| बोली | बोली | spoke |
| बचन | वचन; बातें | words |
| नीति | नीति; विवेकपूर्ण सलाह | prudence; sound counsel |
| रस | रस; सार | essence |
| पागी | पगी हुई; सराबोर | steeped; imbued |
2 कंत करष हरि सन परिहरहू। मोर कहा अति हित हियँ धरहु।।
English explanation
Dear husband, abandon hostility toward Hari, here Rama. Take my deeply beneficial advice to heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कंत | हे प्रिय पति | dear husband |
| करष | वैर; विरोध | hostility; antagonism |
| हरि | हरि, यहाँ राम | Hari, here referring to Rama |
| सन | से; के प्रति | with; toward |
| परिहरहू | छोड़ दीजिए | abandon |
| मोर | मेरा | my |
| कहा | कहा हुआ; सलाह | what I say; advice |
| अति | अत्यंत | very; deeply |
| हित | हितकारी | beneficial |
| हियँ | हृदय में | in your heart |
| धरहु | रखिए; धारण कीजिए | hold; take to heart |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 747
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 747, 747
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