सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उहाँ निसाचर रहहिं ससंका। जब ते जारि गयउ कपि लंका।।
मूल पाठ
उहाँ निसाचर रहहिं ससंका। जब ते जारि गयउ कपि लंका।।
निज निज गृहँ सब करहिं बिचारा। नहिं निसिचर कुल केर उबारा।।
स्रोत अभिलेख 5.36 · पुस्तक पृ. 747, 747
भावार्थ
मूल पाठ के बादवहाँ (लङ्कामें) जबसे हनुमान्जी लङ्काको जलाकर गये, तबसे राक्षस भयभीत रहने लगे। अपने-अपने घरोंमें सब विचार करते हैं कि अब राक्षसकुलकी रक्षा [का कोई उपाय] नहीं है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 747 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 उहाँ निसाचर रहहिं ससंका। जब ते जारि गयउ कपि लंका।।
English explanation
AI draft: Ever since Hanuman burned Lanka and departed, the demons there lived in apprehension.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उहाँ | वहाँ, लंका में | there, in Lanka |
| निसाचर | राक्षस | demons |
| रहहिं | रहते हैं | live; remain |
| ससंका | आशंका और भय से भरे | filled with apprehension |
| जब | जब से | since the time when |
| ते | से | since |
| जारि | जलाकर | having burned |
| गयउ | चले गए | went away |
| कपि | वानर हनुमान | Hanuman, the monkey envoy |
| लंका | लंका नगरी को | the city of Lanka |
2 निज निज गृहँ सब करहिं बिचारा। नहिं निसिचर कुल केर उबारा।।
English explanation
In their respective homes, all think that there is no escape for the demon race.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने-अपने | respective |
| गृहँ | घरों में | in their homes |
| सब | सभी | all |
| करहिं | करते हैं | do; engage in |
| बिचारा | विचार | reflection |
| नहिं | नहीं है | there is no |
| निसिचर | राक्षसों का | of the demons |
| कुल | कुल; वंश | race; lineage |
| केर | का | of; belonging to |
| उबारा | बचाव; उद्धार | escape; deliverance |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 747
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 747, 747
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।