सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जदपि सखा तव इच्छा नाहीं। मोर दरसु अमोघ जग माहीं।।
मूल पाठ
जदपि सखा तव इच्छा नाहीं। मोर दरसु अमोघ जग माहीं।।
अस कहि राम तिलक तेहि सारा। सुमन बृष्टि नभ भई अपारा।।
स्रोत अभिलेख 5.49 · पुस्तक पृ. 758, 759
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[और कहा—] हे सखा! यद्यपि तुम्हारी इच्छा नहीं है, पर जगत्में मेरा दर्शन अमोघ है (वह निष्फल नहीं जाता)। ऐसा कहकर श्रीरामजीने उनको राजतिलक कर दिया। आकाशसे पुष्पोंकी अपार वृष्टि हुई॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 758 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जदपि सखा तव इच्छा नाहीं। मोर दरसु अमोघ जग माहीं।।
English explanation
Friend, although you have no desire for this, seeing me never goes fruitless in this world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जदपि | यद्यपि | although |
| सखा | हे मित्र | O friend |
| तव | तुम्हारी | your |
| इच्छा | इच्छा | desire |
| नाहीं | नहीं है | is absent |
| मोर | मेरा | of me |
| दरसु | दर्शन | seeing; audience |
| अमोघ | कभी निष्फल न होने वाला | unfailingly fruitful |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
2 अस कहि राम तिलक तेहि सारा। सुमन बृष्टि नभ भई अपारा।।
English explanation
Saying this, Rama performed Vibhishana’s royal consecration; an abundant shower of flowers fell from the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| राम | राम ने | Rama |
| तिलक | राजतिलक | royal consecration |
| तेहि | उनका, विभीषण का | for him, Vibhishana |
| सारा | संपन्न किया | performed |
| सुमन | फूलों की | of flowers |
| बृष्टि | वर्षा | shower |
| नभ | आकाश से | from the sky |
| भई | हुई | occurred |
| अपारा | अपार | abundant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.49
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 758
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 758, 759
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।