सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब कृपाल निज भगति पावनी। देहु सदा सिव मन भावनी।।
मूल पाठ
अब कृपाल निज भगति पावनी। देहु सदा सिव मन भावनी।।
एवमस्तु कहि प्रभु रनधीरा। मागा तुरत सिंधु कर नीरा।।
स्रोत अभिलेख 5.49 · पुस्तक पृ. 758, 759
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब तो हे कृपालु! शिवजीके मनको सदैव प्रिय लगनेवाली अपनी पवित्र भक्ति मुझे दीजिये। 'एवमस्तु (ऐसा ही हो) कहकर रणधीर प्रभु श्रीरामजीने तुरंत ही समुद्रका जल माँगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 758 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अब कृपाल निज भगति पावनी। देहु सदा सिव मन भावनी।।
English explanation
Now, compassionate Lord, grant me purifying devotion to you, which is ever dear to Shiva’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| कृपाल | हे कृपालु | O compassionate Lord |
| निज | अपने प्रति | to yourself |
| भगति | भक्ति | devotion |
| पावनी | पवित्र करने वाली | purifying |
| देहु | दीजिए | grant |
| सदा | सदा | always |
| सिव | भगवान शिव के | of Lord Shiva |
| मन | मन को | to the heart |
| भावनी | प्रिय लगने वाली | pleasing; dear |
2 एवमस्तु कहि प्रभु रनधीरा। मागा तुरत सिंधु कर नीरा।।
English explanation
Saying, ‘So be it,’ the Lord, steadfast in battle, immediately requested water from the sea.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एवमस्तु | ऐसा ही हो | so be it |
| कहि | कहकर | having said |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| रनधीरा | रण में धीर | steadfast in battle |
| मागा | मँगाया | requested |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| सिंधु | समुद्र | the sea |
| कर | का | of |
| नीरा | जल | water |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.49
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 758
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 758, 759
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।