सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चौदह भुवन एक पति होई। भूतद्रोह तिष्टइ नहिं सोई।।
मूल पाठ
चौदह भुवन एक पति होई। भूतद्रोह तिष्टइ नहिं सोई।।
गुन सागर नागर नर जोऊ। अलप लोभ भल कहइ न कोऊ।।
स्रोत अभिलेख 5.38 · पुस्तक पृ. 748, 749
भावार्थ
मूल पाठ के बादचौदहों भुवनोंका एक ही स्वामी हो, वह भी जीवोंसे वैर करके ठहर नहीं सकता (नष्ट हो जाता है)। जो मनुष्य गुणोंका समुद्र और चतुर हो, उसे चाहे थोड़ा भी लोभ क्यों न हो, तो भी कोई भला नहीं कहता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 749 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चौदह भुवन एक पति होई। भूतद्रोह तिष्टइ नहिं सोई।।
English explanation
Even if someone is the sole lord of all fourteen worlds, they cannot endure by acting with hostility toward living beings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चौदह | चौदह | fourteen |
| भुवन | लोकों का | of the worlds |
| एक | एकमात्र | sole |
| पति | स्वामी | lord; ruler |
| होई | हो; हो जाए | may be; may become |
| भूतद्रोह | प्राणियों से द्रोह करके | through hostility toward living beings |
| तिष्टइ | टिकता है | endures; remains secure |
| नहिं | नहीं | not |
| सोई | वह भी | even that person |
2 गुन सागर नागर नर जोऊ। अलप लोभ भल कहइ न कोऊ।।
English explanation
Even a refined person who is an ocean of virtues is called good by no one if they have even a little greed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुन | गुणों का | of virtues |
| सागर | सागर | an ocean |
| नागर | सुशील; शिष्ट | refined; courteous |
| नर | मनुष्य | person |
| जोऊ | जो भी | whoever; even one who |
| अलप | थोड़ा-सा | a little |
| लोभ | लोभ होने पर | with greed |
| भल | भला; अच्छा | good |
| कहइ | कहता है | calls |
| न | नहीं | not |
| कोऊ | कोई | anyone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.38
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 749
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 748, 749
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