सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो आपन चाहै कल्याना। सुजसु सुमति सुभ गति सुख नाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो मनुष्य अपना कल्याण, सुन्दर यश, सुबुद्धि, शुभ गति और नाना प्रकारके सुख चाहता हो, वह हे स्वामी! परस्त्रीके ललाटको चौथके चन्द्रमाकी तरह त्याग दे (अर्थात् जैसे लोग चौथके चन्द्रमाको नहीं देखते, उसी प्रकार परस्त्रीका मुख ही न देखे)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 749 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जो आपन चाहै कल्याना। सुजसु सुमति सुभ गति सुख नाना।।
सो परनारि लिलार गोसाईं। तजउ चउथि के चंद कि नाई।।
स्रोत अभिलेख 5.38 · पुस्तक पृ. 748, 749
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जो आपन चाहै कल्याना। सुजसु सुमति सुभ गति सुख नाना।।
English explanation
Whoever desires their own welfare, good reputation, sound understanding, a fortunate destiny, and many kinds of happiness—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो कोई | whoever |
| आपन | अपना | their own |
| चाहै | चाहता है | desires |
| कल्याना | कल्याण | welfare |
| सुजसु | उत्तम यश | good reputation |
| सुमति | अच्छी बुद्धि | sound understanding |
| सुभ | शुभ | auspicious |
| गति | गति; अंतिम अवस्था | destiny; ultimate state |
| सुख | सुख | happiness |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
2 सो परनारि लिलार गोसाईं। तजउ चउथि के चंद कि नाई।।
English explanation
My lord, such a person should avoid looking at another’s wife’s forehead, just as one avoids looking at the moon on the fourth lunar day.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह व्यक्ति | that person |
| परनारि | दूसरे की पत्नी का | another man’s wife’s |
| लिलार | ललाट; माथा | forehead |
| गोसाईं | हे स्वामी | my lord |
| तजउ | त्याग दे; देखना छोड़ दे | should shun; avoid looking at |
| चउथि | चौथी चंद्रतिथि | the fourth lunar day |
| के | के | of |
| चंद | चंद्रमा | moon |
| कि | की | of |
| नाई | तरह | like; in the manner of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.38
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 749
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 748, 749
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।