सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
की तुम्ह हरि दासन्ह महँ कोई। मोरें हृदय प्रीति अति होई।।
मूल पाठ
की तुम्ह हरि दासन्ह महँ कोई। मोरें हृदय प्रीति अति होई।।
की तुम्ह रामु दीन अनुरागी। आयहु मोहि करन बड़भागी।।
स्रोत अभिलेख 5.6 · पुस्तक पृ. 719, 720
भावार्थ
मूल पाठ के बादक्या आप हरिभक्तोंमेंसे कोई हैं? क्योंकि आपको देखकर मेरे हृदयमें अत्यन्त प्रेम उमड़ रहा है। अथवा क्या आप दीनोंसे प्रेम करनेवाले स्वयं श्रीरामजी ही हैं, जो मुझे बड़भागी बनाने (घर- बैठे दर्शन देकर कृतार्थ करने) आये हैं?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 720 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 की तुम्ह हरि दासन्ह महँ कोई। मोरें हृदय प्रीति अति होई।।
English explanation
‘Are you one of the Lord’s servants? Great affection for you is arising in my heart.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| की | क्या | are; question marker |
| तुम्ह | आप | you |
| हरि | भगवान के | of the Lord |
| दासन्ह | सेवकों | servants |
| महँ | में | among |
| कोई | कोई एक | one |
| मोरें | मेरे | my |
| हृदय | हृदय में | in the heart |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| अति | बहुत | great; intense |
| होई | उत्पन्न हो रहा है | is arising |
2 की तुम्ह रामु दीन अनुरागी। आयहु मोहि करन बड़भागी।।
English explanation
‘Or are you Rama himself, who loves the lowly, come to make me greatly fortunate?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| की | या क्या | or are |
| तुम्ह | आप | you |
| रामु | भगवान राम | Lord Rama |
| दीन | दीनों; असहायों के प्रति | toward the lowly and helpless |
| अनुरागी | प्रेम रखने वाले | loving; affectionate |
| आयहु | आप आए हैं | you have come |
| मोहि | मुझे | me |
| करन | बनाने के लिए | to make |
| बड़भागी | बड़ा भाग्यवान | greatly fortunate |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 720
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 719, 720
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।