सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिप्र रुप धरि बचन सुनाए। सुनत बिभीषण उठि तहँ आए।।
मूल पाठ
बिप्र रुप धरि बचन सुनाए। सुनत बिभीषण उठि तहँ आए।।
करि प्रनाम पूँछी कुसलाई। बिप्र कहहु निज कथा बुझाई।।
स्रोत अभिलेख 5.6 · पुस्तक पृ. 719, 720
भावार्थ
मूल पाठ के बादब्राह्मणका रूप धरकर हनुमान्जीने उन्हें वचन सुनाये (पुकारा)। सुनते ही विभीषणजी उठकर वहाँ आये। प्रणाम करके कुशल पूछी [और कहा कि] हे ब्राह्मणदेव! अपनी कथा समझाकर कहिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 720 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिप्र रुप धरि बचन सुनाए। सुनत बिभीषण उठि तहँ आए।।
English explanation
Hanuman assumed a Brahmin’s form and spoke. On hearing him, Vibhishana rose and came there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्र | ब्राह्मण का | of a Brahmin |
| रुप | रूप | form |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| बचन | वचन; शब्द | words |
| सुनाए | कहे; सुनाए | spoke; uttered |
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| बिभीषण | विभीषण, रावण के भाई | Vibhishana, Ravana’s brother |
| उठि | उठकर | having risen |
| तहँ | वहाँ | there |
| आए | आए | came |
2 करि प्रनाम पूँछी कुसलाई। बिप्र कहहु निज कथा बुझाई।।
English explanation
Vibhishana bowed, asked after his well-being, and said: ‘Brahmin, tell me your story clearly.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having made |
| प्रनाम | प्रणाम | a respectful salutation |
| पूँछी | पूछी | asked about |
| कुसलाई | कुशल; हालचाल | well-being |
| बिप्र | हे ब्राह्मण | O Brahmin |
| कहहु | कहिए | please tell |
| निज | अपनी | your own |
| कथा | कथा; वृत्तांत | story; account |
| बुझाई | समझाकर | explaining clearly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 720
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 719, 720
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।