सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम राम तेहिं सुमिरन कीन्हा। हृदयँ हरष कपि सज्जन चीन्हा।।
मूल पाठ
राम राम तेहिं सुमिरन कीन्हा। हृदयँ हरष कपि सज्जन चीन्हा।।
एहि सन हठि करिहउँ पहिचानी। साधु ते होइ न कारज हानी।।
स्रोत अभिलेख 5.6 · पुस्तक पृ. 719, 720
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्होंने (विभीषणने) रामनामका स्मरण (उच्चारण) किया। हनुमान्जीने उन्हें सज्जन जाना और हृदयमें हॢषत हुए। [हनुमान्जीने विचार किया कि] इनसे हठ करके (अपनी ओरसे ही) परिचय करूँगा, क्योंकि साधुसे कार्यकी हानि नहीं होती [प्रत्युत लाभ ही होता है]॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 720 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम राम तेहिं सुमिरन कीन्हा। हृदयँ हरष कपि सज्जन चीन्हा।।
English explanation
Vibhishana remembered Rama, saying ‘Rama, Rama.’ Delighted at heart, Hanuman recognized him as a virtuous person.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम का नाम | Rama’s name |
| राम | राम का नाम, पुनः | Rama’s name, repeated |
| तेहिं | उन्होंने, विभीषण ने | he, Vibhishana |
| सुमिरन | स्मरण | remembrance |
| कीन्हा | किया | performed |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| हरष | हर्ष; प्रसन्नता | joy; delight |
| कपि | हनुमान | Hanuman |
| सज्जन | सज्जन व्यक्ति के रूप में | as a virtuous person |
| चीन्हा | पहचान लिया | recognized |
2 एहि सन हठि करिहउँ पहिचानी। साधु ते होइ न कारज हानी।।
English explanation
Hanuman thought: ‘I shall certainly make his acquaintance; a good person does not cause harm to one’s undertaking.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इनसे, विभीषण से | this person, Vibhishana |
| सन | के साथ; से | with |
| हठि | दृढ़ निश्चय से; अवश्य | resolutely; certainly |
| करिहउँ | मैं करूँगा | I shall make |
| पहिचानी | परिचय | acquaintance |
| साधु | साधु; सज्जन व्यक्ति | a good, virtuous person |
| ते | से | from; through |
| होइ | होती है | occurs |
| न | नहीं | not |
| कारज | कार्य की | to the undertaking |
| हानी | हानि | harm |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 720
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 719, 720
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।