सुन्दरकाण्ड · दोहा 6 · दोहा/सोरठा
तब हनुमंत कही सब राम कथा निज नाम।
तब हनुमंत कही सब राम कथा निज नाम।
सुनत जुगल तन पुलक मन मगन सुमिरि गुन ग्राम।।6।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.6 · पुस्तक पृ. 719, 720
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तब हनुमंत कही सब राम कथा निज नाम।
तब हनुमान ने राम का सारा वृत्तांत और अपना नाम बताया।
English explanation
Then Hanuman related the whole account of Rama and told his own name.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| हनुमंत | हनुमान, राम के सेवक | Hanuman, Rama’s servant |
| कही | बताई; कही | related; told |
| सब | सारी | all; the whole |
| राम | राम का | of Rama |
| कथा | वृत्तांत | account |
| निज | अपना | his own |
| नाम | नाम | name |
2 सुनत जुगल तन पुलक मन मगन सुमिरि गुन ग्राम।।6।।
सुनते ही दोनों के शरीर रोमांचित हो गए और राम के गुणों का समूह स्मरण करके उनके मन आनंद में मग्न हो गए।
English explanation
On hearing this, both felt their bodies thrill, and their minds became absorbed in joy as they remembered Rama’s many virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| जुगल | दोनों, हनुमान और विभीषण | both, Hanuman and Vibhishana |
| तन | शरीर | bodies |
| पुलक | रोमांचित | thrilled, with hair standing on end |
| मन | मन | minds |
| मगन | आनंद में मग्न | absorbed in joy |
| सुमिरि | स्मरण करके | remembering |
| गुन | राम के गुणों का | of Rama’s virtues |
| ग्राम | समूह; समुच्चय | multitude; collection |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 6
- स्रोत अभिलेख
- 5.6
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 719, 720
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।