सुन्दरकाण्ड · दोहा 5 · दोहा/सोरठा
रामायुध अंकित गृह सोभा बरनि न जाइ।
रामायुध अंकित गृह सोभा बरनि न जाइ।
नव तुलसिका बृंद तहँ देखि हरषि कपिराइ।।5।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.5 · पुस्तक पृ. 719, 719
भावार्थ और शब्दार्थ
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1रामायुध अंकित गृह सोभा बरनि न जाइ।
घर पर राम के आयुधों के चिह्न अंकित थे; उसकी शोभा का वर्णन नहीं किया जा सकता।
English explanation
The house bore emblems of Rama’s weapons; its beauty could not be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामायुध | राम के आयुधों के चिह्न | emblems of Rama’s weapons |
| अंकित | अंकित | marked; inscribed |
| गृह | घर | house |
| सोभा | सुंदरता | beauty |
| बरनि | वर्णन किया | described |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
2 नव तुलसिका बृंद तहँ देखि हरषि कपिराइ।।5।।
वहाँ नए तुलसी-पौधों के समूह देखकर वानरश्रेष्ठ हनुमान हर्षित हुए।
English explanation
Seeing clusters of young holy basil plants there, Hanuman, foremost among monkeys, rejoiced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नव | नए; तरुण | new; young |
| तुलसिका | तुलसी के पौधों के | of holy basil plants |
| बृंद | समूह | clusters |
| तहँ | वहाँ | there |
| देखि | देखकर | seeing |
| हरषि | हर्षित हुए | rejoiced |
| कपिराइ | वानरश्रेष्ठ हनुमान | Hanuman, foremost among monkeys |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 5
- स्रोत अभिलेख
- 5.5
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 719, 719
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