सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कर जोरें सुर दिसिप बिनीता। भृकुटि बिलोकत सकल सभीता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददेवता और दिक्पाल हाथ जोड़े बड़ी नम्रताके साथ भयभीत हुए सब रावणकी भौं ताक रहे हैं। (उसका रुख देख रहे हैं।) उसका ऐसा प्रताप देखकर भी हनुमान्जीके मनमें जरा भी डर नहीं हुआ। वे ऐसे नि:शङ्क खड़े रहे जैसे सर्पोंके समूहमें गरुड़ नि:शङ्क (निर्भय) रहते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 733 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कर जोरें सुर दिसिप बिनीता। भृकुटि बिलोकत सकल सभीता।।
देखि प्रताप न कपि मन संका। जिमि अहिगन महुँ गरुड़ असंका।।
स्रोत अभिलेख 5.2 · पुस्तक पृ. 732, 733
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कर जोरें सुर दिसिप बिनीता। भृकुटि बिलोकत सकल सभीता।।
English explanation
The gods and guardians of the directions stood humbly with folded hands; all watched Ravana’s brows in fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कर | हाथ | hands |
| जोरें | जोड़े हुए | folded together |
| सुर | देवता | gods |
| दिसिप | दिशाओं के अधिपति; दिक्पाल | guardians of the directions |
| बिनीता | विनीत; नम्र | humble; submissive |
| भृकुटि | रावण की भौंहों को | Ravana’s brows |
| बिलोकत | देखते हुए | watching |
| सकल | सभी | all |
| सभीता | भय सहित; डरे हुए | fearful; afraid |
2 देखि प्रताप न कपि मन संका। जिमि अहिगन महुँ गरुड़ असंका।।
English explanation
Even on seeing Ravana’s might, Hanuman felt no fear, just as Garuda remains fearless among a host of serpents.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | on seeing |
| प्रताप | रावण का तेज और शक्ति | Ravana’s might and imposing power |
| न | नहीं | no |
| कपि | हनुमान के | Hanuman’s |
| मन | मन में | in the mind |
| संका | भय; आशंका | fear; apprehension |
| जिमि | जैसे | just as |
| अहिगन | सर्पों के समूह | a host of serpents |
| महुँ | के बीच | among |
| गरुड़ | गरुड़, विष्णु के पक्षीरूपी वाहन | Garuda, Vishnu’s bird mount |
| असंका | निर्भय | fearless |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 733
- सहायक विषय
- हनुमान्जीद्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान्जीको नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 732, 733
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।