सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उमा संत कइ इहइ बड़ाई। मंद करत जो करइ भलाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[शिवजी कहते हैं—] हे उमा! संतकी यही बड़ाई (महिमा) है कि वे बुराई करनेपर भी [बुराई करनेवालेकी] भलाई ही करते हैं। [विभीषणजीने कहा—] आप मेरे पिताके समान हैं, मुझे मारा सो तो अच्छा ही किया; परन्तु हे नाथ! आपका भला श्रीरामजीको भजनेमें ही है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 752 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
उमा संत कइ इहइ बड़ाई। मंद करत जो करइ भलाई।।
तुम्ह पितु सरिस भलेहिं मोहि मारा। रामु भजें हित नाथ तुम्हारा।।
स्रोत अभिलेख 5.41 · पुस्तक पृ. 751, 752
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 उमा संत कइ इहइ बड़ाई। मंद करत जो करइ भलाई।।
English explanation
Uma, this is the greatness of a saint: he does good even to one who harms him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उमा | हे उमा, पार्वती | Uma, the goddess Parvati |
| संत | संत | a saint |
| कइ | की | of; possessive marker |
| इहइ | यही | this very |
| बड़ाई | महानता | greatness |
| मंद | बुराई; अहित | harm; ill |
| करत | करने वाले के प्रति | toward one doing |
| जो | जो संत | who; the saint who |
| करइ | करता है | does |
| भलाई | भला; उपकार | good; kindness |
2 तुम्ह पितु सरिस भलेहिं मोहि मारा। रामु भजें हित नाथ तुम्हारा।।
English explanation
‘You are like a father to me; though you have struck me, my lord, your welfare lies in devotion to Rama.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| पितु | पिता | a father |
| सरिस | के समान | like |
| भलेहिं | भले ही; यद्यपि | even though |
| मोहि | मुझे | me |
| मारा | मारा; प्रहार किया | struck |
| रामु | राम का | Rama |
| भजें | भजन करने में; शरण लेने में | in worshipping; in seeking refuge in |
| हित | भला; कल्याण | welfare |
| नाथ | हे स्वामी | my lord |
| तुम्हारा | आपका | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 752
- सहायक विषय
- रावणको विभीषणका समझाना और विभीषणका अपमान
- मुद्रित पृष्ठ
- 751, 752
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।