सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मम पुर बसि तपसिन्ह पर प्रीती। सठ मिलु जाइ तिन्हहि कहु नीती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमेरे नगरमें रहकर प्रेम करता है तपस्वियोंपर। मूर्ख! उन्हींसे जा मिल और उन्हींको नीति बता। ऐसा कहकर रावणने उन्हें लात मारी। परन्तु छोटे भाई विभीषणने (मारनेपर भी) बार-बार उसके चरण ही पकड़े॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 751 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मम पुर बसि तपसिन्ह पर प्रीती। सठ मिलु जाइ तिन्हहि कहु नीती।।
अस कहि कीन्हेसि चरन प्रहारा। अनुज गहे पद बारहिं बारा।।
स्रोत अभिलेख 5.41 · पुस्तक पृ. 751, 752
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मम पुर बसि तपसिन्ह पर प्रीती। सठ मिलु जाइ तिन्हहि कहु नीती।।
English explanation
‘Living in my city, you cherish those ascetics! Fool, go join them and teach them your principles.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मम | मेरे | my |
| पुर | नगर में | in the city |
| बसि | रहकर | while dwelling |
| तपसिन्ह | तपस्वियों; राम और लक्ष्मण | the ascetics, Rama and Lakshmana |
| पर | के प्रति | toward |
| प्रीती | प्रेम | affection |
| सठ | हे मूर्ख | you fool |
| मिलु | मिल; जा मिल | join; meet |
| जाइ | जाकर | having gone |
| तिन्हहि | उन्हीं को | to those very people |
| कहु | कह; समझा | tell; explain |
| नीती | नीति; उचित आचरण की सीख | principles of right conduct |
2 अस कहि कीन्हेसि चरन प्रहारा। अनुज गहे पद बारहिं बारा।।
English explanation
Saying this, Ravana kicked him; his younger brother Vibhishana repeatedly clasped his feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| कीन्हेसि | उसने किया | he made; he delivered |
| चरन | पैर से | with the foot |
| प्रहारा | प्रहार; लात | a blow; a kick |
| अनुज | छोटे भाई विभीषण ने | the younger brother, Vibhishana |
| गहे | पकड़े | clasped |
| पद | पैर | feet |
| बारहिं | बार-बार | repeatedly |
| बारा | बार; बार-बार | times; again and again |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 751
- सहायक विषय
- रावणको विभीषणका समझाना और विभीषणका अपमान
- मुद्रित पृष्ठ
- 751, 752
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।