सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिअसि सदा सठ मोर जिआवा। रिपु कर पच्छ मूढ़ तोहि भावा।।
मूल पाठ
जिअसि सदा सठ मोर जिआवा। रिपु कर पच्छ मूढ़ तोहि भावा।।
कहसि न खल अस को जग माहीं। भुज बल जाहि जिता मैं नाही।।
स्रोत अभिलेख 5.41 · पुस्तक पृ. 751, 752
भावार्थ
मूल पाठ के बादअरे मूर्ख! तू जीता तो है सदा मेरा जिलाया हुआ (अर्थात् मेरे ही अन्नसे पल रहा है), पर हे मूढ! पक्ष तुझे शत्रुका ही अच्छा लगता है। अरे दुष्ट! बता न, जगत्में ऐसा कौन है जिसे मैंने अपनी भुजाओंके बलसे न जीता हो?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 751 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जिअसि सदा सठ मोर जिआवा। रिपु कर पच्छ मूढ़ तोहि भावा।।
English explanation
‘Fool! You have always lived by my support, yet, ignorant one, you have taken a liking to the enemy’s side.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिअसि | तू जीता है | you live |
| सदा | सदा | always |
| सठ | हे मूर्ख | you fool |
| मोर | मेरे द्वारा | by me |
| जिआवा | पालित; जीवित रखा गया | sustained; kept alive |
| रिपु | शत्रु | the enemy |
| कर | का | of; possessive marker |
| पच्छ | पक्ष | side; cause |
| मूढ़ | हे अज्ञानी | you ignorant one |
| तोहि | तुझे | to you |
| भावा | अच्छा लगा | pleased; appealed to |
2 कहसि न खल अस को जग माहीं। भुज बल जाहि जिता मैं नाही।।
English explanation
‘Wretch! Tell me, who in this world have I not conquered by the strength of my arms?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहसि | तू बता | you tell me |
| न | न; आग्रहसूचक | come on; urging particle |
| खल | हे दुष्ट | you wretch |
| अस | ऐसा | such |
| को | कौन | who |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| भुज | भुजाओं का | of the arms |
| बल | बल; शक्ति | strength |
| जाहि | जिसे | whom |
| जिता | जीता; पराजित किया | conquered |
| मैं | मैंने | I |
| नाही | नहीं | not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 751
- सहायक विषय
- रावणको विभीषणका समझाना और विभीषणका अपमान
- मुद्रित पृष्ठ
- 751, 752
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